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  • testimonial avatar                                                        भुखमरी से जंग

    Deepak Bajpai

    गरीबी, भुखमरी और बीमारियों के दुनिया भर के आंकड़े और उनमें भारत की स्थिति मन में गहरी टीस पैदा करती है. दुनिया भर में कोई साठ करोड़ लोग भूखे पेट सोते हैं. इनमें से बीस करोड़ लोग भारतीय हैं. भुखमरी के शिकार लोगों की सबसे बड़ी आबादी हमारे देश में रहती है. ये अकेला आंकड़ा मेरी नींद हराम कर देता है. रोज कोई नौ हजार बच्चे कुपोषण से मौत का शिकार बन जाते हैं, और हम कुछ नहीं कर पाते. गौरवशाली अतीत वाले विराट भारतवर्ष की ये तस्वीर हर भारतवासी के लिए सिर्फ शर्म का विषय नहीं है, कुछ कर गुजरने की प्रेरणा भी है. जब हम आंकड़ों को और गहरा खंगालते हैं तो पता चलता है कि भारत की धरती इतना अन्न उपजाती है कि भारत भूमि पर रहने वाले हर आदमी का पेट भरने के बाद भी दस फ़ीसदी से ज्यादा अन्न बच जाये. फिर बीस करोड़ हिन्दुस्तानी भूखे पेट सोने को मजबूर क्यों हैं? फिर 9000 बच्चे दूध के दांत टूटने से पहले मौत की नींद क्यों सो जाते हैं? ये सवाल ज्यादा शर्मिंदा करते हैं.

    भूख एक चालाक दुश्मन और शातिर शिकारी है. ये ताक़तवर लोगों का ध्यान भटकाकर कमजोर लोगों पर हमला करती है और अपना शिकार बनाती है. भूख जानती है कि कोई एक सरकार, कोई एक इंसान, कोई एक संस्था या कोई एक धन्नासेठ उसे नहीं हरा सकता. कई सरकारों, धन्नासेठों, संस्थाओं, मठ-मंदिरों ने भूख को चुनौती दी पर भूख नहीं हारी. अब भी इस देश में सैकड़ों ऐसी रसोइयाँ हैं जहां हर रोज हजारों लोगों को भोजन कराया जाता है, पर भूख फिर भी नहीं हारती, सोचिये क्यों?

    दरअसल भूख उस दिन हारेगी जिस दिन देश का हर आदमी उससे जंग के लिए अपने घर से निकल पड़ेगा. हमें भूख को एक-एक गाँव, एक-एक कसबे और शहर से खदेड़ना है. भूख के खिलाफ जंग में बस हर एक आदमी की हिस्सेदारी जरूरी है. जिस दिन हम सब अपने माथे पर लगा ये कलंक मिटाने की ठान लेंगे, भूख के पाँव उखड जायेंगे.

    भूख के खिलाफ जंग बासो या उससे जुड़े लोगों के अहंकार का उद्घोष नहीं है. हमें अपनी औकात का पता है. भूख किसी एक आदमी या एक संस्था की गीदड़ भभकी से डरने वाली है भी नहीं. भूख के खिलाफ जंग का हमारा ऐलान सब साथियों, कमेरों, लड़ाकों को एक आवाज़ भर है, कि चलो जिसके पास जो है, लेकर निकल पड़ो और इस चालाक हत्यारे दुश्मन को जमीन के आख़िरी छोर तक खदेड़ आओ. दो-दो पैसा या दो-दो मुट्ठी अनाज ही सबने जोड़ा तो ही भूख के पैर उखड जायेंगे. और जो दो पैसे या दो मुट्ठी अनाज भी न जुड़े तो भी सड़क पर उतरो और भूख को ललकारो, साथियों को जगाओ कि अपने माथे से भुखमरी का कलंक धोने का वक्त आ गया है.

    मेरा विश्वास करो- सब साथ आये, मिलकर लड़े तो भूख हारेगी, ज़िन्दगी जीतेगी.

     

     

    Founder

    Was a frontline journalist for two decades in India. Leading public movement for liberation from poverty and starvation.

    Deepak Bajpai

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